अपनो ने पहचाना नही
दोस्तो ने जाना नही
दुनिया ने समझा नही
इश्क़ न अपनाया नही
सब के साथ मैं चलता नही
हर किसी से मिलता नही
मिल गया तो मुझसा नही
वरना मुझ को पूछना नही
अब किसी की सुनता नही
ख्वाइशों को रोकता नही
सपनों पर पाबंदी नही
कदमों के पीछे चलता नही
मेरे पीछे आना नही
आ गए तो रुकना नही
रुक जाओ तो पुकारना नही
खो गया तो ढूढ़ना नही
नहीं रहा तो रोना नही
रास्ता मेरा तकना नही
रात भर का जगना नही
उम्मीद पे बैठे रहना नही
कोई किसी का अपना नही
बंधन में बंध जाना नही
झूठे कसमें खाना नही
जब तक खुद को जाना नही
मानव

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