आज फिर उसकी याद आई
आज फिर एक खत लिखते है
बयां कर ही देंगे आज हाल-ए-दिल
और बना देंगे उस खत से एक नाव
बहा देंगे अपने खुवाईशो के समंदर में उसे
जाए खुद से टकरा जाए उनसे वो
और कही मिल जाए तो कह देना
अब इंतेज़ार खत्म किये बैठा हूँ
के मैं अब जाम खत्म किये बैठा हूँ
मानव

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