नयन में जो बसे
ऐसे दर्पण ला दो
हृदय धड़के जिससे
ऐसे गीत ला दो
मुख में सदा रहे
मीठे वचन ला दो
चरित्र में जो दिखे
ऐसा तेज ला दो
सर उठा कर चले
ऐसा जस ला दो
मनुष्यता जहां उगे
ऐसे धर्म ला दो
न्याय जहां रहे
ऐसा राष्ट्र ला दो
मन में राम रहे
ऐसा जुग ला दो
“मानव” राजेश कुट्टन

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