मैं अपने आप में था

किसी के पास था, फिर भी नहीं था
मैं अपने आप में था, पर कहीं नहीं था

जो दोस्ती थी, वो लफ़्ज़ों में रह गई बस
जो दिल से जुड़ा हो, वो कहीं नहीं था

वो साथ चलता रहा सारे रास्तों पर
मगर जो चल सके भीतर, वही नहीं था

मैं हर ख़ुशी में शामिल रहा मुस्कुरा के
मगर जो बात थी, वो तो कही नहीं था

बहुत से नाम थे रिश्तों की भीड़ में
मगर जो नाम मेरा था — वही नहीं था

कभी जो लोग मेरी रूह तक पहुँचे थे
वो पास आए, मगर अब वही नहीं था

कभी किसी ने पूछा ही नहीं हाल मेरा
“तू ठीक है?” ये भी सवाल नहीं था

~ राजेश कुट्टन ‘मानव’


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4 responses to “मैं अपने आप में था”

  1. मेरा घर एक लेखिका Avatar

    बहुत सुन्दर लेखन कला है

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    1. Rajesh Kuttan Avatar

      धन्यवाद!

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  2. Dr Garima tyagi Avatar

    बहुत सुंदर सृजन 👌

    Liked by 1 person

    1. Rajesh Kuttan Avatar

      आपकी सराहना हर बार एक मुस्कान छोड़ जाती है। ऐसे ही जुड़े रहिए, बहुत अच्छा लगता है।

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