परिचय
भारत ने अपने सैन्य अभियानों, जैसे ऑपरेशन सिन्दूर (7 मई 2025), बालाकोट हवाई हमला (26 फरवरी 2019), और उरी सर्जिकल स्ट्राइक (29 सितंबर 2016), को रात के अंधेरे में अंजाम दिया। यह सोचा-समझा निर्णय रणनीति, युद्धकौशल और तकनीकी लाभों का मिश्रण है, जो ऑपरेशन की सफलता को बढ़ाता है और जोखिम को कम करता है। यह लेख इस बात की पड़ताल करता है कि भारत ने बार-बार रात के ऑपरेशनों को क्यों चुना, खास तौर पर ऑपरेशन सिन्दूर पर ध्यान देते हुए। साथ ही, इसमें उन तकनीकों और रणनीतियों की विस्तृत जानकारी दी गई है, जो रात के ऑपरेशनों को संभव बनाती हैं। यह सैन्य रणनीति और तकनीकी प्रगति के आपसी तालमेल की भी जांच करता है, जो रात के ऑपरेशनों को भारत की पसंद बनाते हैं।
रणनीतिक कारण
1. आश्चर्य का लाभ
रात के ऑपरेशन आश्चर्य के तत्व का पूरा फायदा उठाते हैं, जो सैन्य रणनीति का मूल आधार है। अंधेरा दुश्मन की निगरानी और जवाबी कार्रवाई को मुश्किल बनाता है, क्योंकि उनकी सतर्कता रात में कम होती है। ऑपरेशन सिन्दूर, जो रात 1:44 बजे शुरू हुआ, में भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। समय का चयन इस तरह किया गया कि आतंकी और उनके सहयोगी अप्रस्तुत रहें, क्योंकि रात में मानवीय सतर्कता और गतिविधियां आमतौर पर कम होती हैं। इसी तरह, बालाकोट हवाई हमला सुबह 3:30 बजे जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के शिविर पर हुआ, जिसने दुश्मन को चौंकाया। उरी सर्जिकल स्ट्राइक भी सुबह होने से पहले किए गए, ताकि कम दृश्यता और शांत गतिविधियों का फायदा मिले।
2. अपने सैनिकों की सुरक्षा
रात का अंधेरा भारतीय सैनिकों की गतिविधियों को छिपाकर जोखिम कम करता है। ऑपरेशन सिन्दूर में भारतीय वायु सेना (IAF) ने राफेल और मिराज 2000 जैसे विमानों से भारतीय क्षेत्र के भीतर रहकर SCALP क्रूज मिसाइल और HAMMER सटीक बमों से हमले किए, बिना सीमा पार किए। इससे दुश्मन की वायु रक्षा प्रणालियों का सामना करने का खतरा कम हुआ, जो रात में कम प्रभावी होती हैं, क्योंकि वे ऑप्टिकल सिस्टम और रडार पर निर्भर होती हैं, जो कम ऊंचाई पर उड़ने वाले या गुप्त विमानों को पकड़ने में कमजोर हैं। उरी सर्जिकल स्ट्राइक में पैरा स्पेशल फोर्स ने रात के अंधेरे में नियंत्रण रेखा (LoC) पार की, जिससे पाकिस्तानी चौकियों द्वारा पकड़े जाने की संभावना कम हुई।
3. मनोवैज्ञानिक दबाव
रात में हमले दुश्मन पर मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ाते हैं। अप्रत्याशित रात के हमले दुश्मन का हौसला तोड़ते हैं और उनमें असुरक्षा की भावना पैदा करते हैं। ऑपरेशन सिन्दूर का 25 मिनट में तेजी से पूरा होना, जिसमें JeM के बहावलपुर में मार्कज सुभान अल्लाह और LeT के मुरीदके में मार्कज तैबा जैसे आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, ने भारत की ताकत और इरादे का सशक्त संदेश दिया। ऑपरेशन का नाम, जो पहलगाम हमले की विधवाओं के सिन्दूर से प्रतीकात्मक रूप से जुड़ा था, ने आतंकी नेटवर्क और उनके समर्थकों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव को और गहरा किया।
4. नागरिकों की सुरक्षा
रात के ऑपरेशन तब किए जाते हैं, जब नागरिकों की मौजूदगी कम होती है, जिससे अनावश्यक नुकसान का खतरा कम होता है। ऑपरेशन सिन्दूर में रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हमले “केंद्रित, संतुलित और गैर-उत्तेजक” थे, जिनमें पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों और नागरिक क्षेत्रों को निशाना नहीं बनाया गया। लंबे समय की निगरानी और खुफिया जानकारी से सुनिश्चित हुआ कि केवल आतंकी ढांचे पर हमला हो। बालाकोट हवाई हमला ने भी रात में एक दूरस्थ JeM शिविर को निशाना बनाया, ताकि नागरिक हताहत न हों। सटीक हथियारों ने नुकसान को सीमित रखा। यह भारत की संयमित और नैतिक युद्ध नीति को दर्शाता है।
तकनीकी पहलू: रात के ऑपरेशनों को संभव बनाना
भारत की रात में जटिल ऑपरेशन करने की क्षमता उन्नत तकनीक, खुफिया जानकारी और रणनीति पर आधारित है। नीचे वे प्रमुख तकनीकी कारक हैं, जिन्होंने ऑपरेशन सिन्दूर और इसके पहले के ऑपरेशनों को सफल बनाया।
1. रात्रि-दृष्टि और सेंसर तकनीक
भारतीय सेना कम रोशनी में काम करने के लिए रात्रि-दृष्टि उपकरणों (NVDs) और इन्फ्रारेड (IR) सेंसरों का उपयोग करती है। ऑपरेशन सिन्दूर में IAF ने LITENING या Damocles जैसे लक्ष्यीकरण पॉड्स का इस्तेमाल किया, जो थर्मल इमेजिंग और लेजर मार्गदर्शन को जोड़ते हैं। ये सिस्टम पायलटों को पूर्ण अंधेरे में भी लक्ष्य की पहचान और हमला करने में सक्षम बनाते हैं। उरी सर्जिकल स्ट्राइक में पैरा स्पेशल फोर्स ने हेलमेट पर लगे NVDs और थर्मल स्कोप्स का उपयोग किया, जिससे कठिन इलाकों में गुप्त रूप से आगे बढ़ना और हमला करना संभव हुआ। X पर पोस्ट्स में ऑपरेशन सिन्दूर में भारत के उन्नत रात्रि-दृष्टि सिस्टम की चर्चा हुई, जो गुप्तता बढ़ाने में उनकी भूमिका को दर्शाती है।
2. सटीक-निर्देशित हथियार (PGMs)
ऑपरेशन सिन्दूर की सफलता में सटीक हथियारों की बड़ी भूमिका थी। IAF ने निम्नलिखित का उपयोग किया:
- SCALP क्रूज मिसाइलें: लंबी दूरी की मिसाइलें, जो जड़त्वीय, GPS, और टेरेन-कॉन्टूर मिलान (TERCOM) नेविगेशन से लैस हैं। ये JeM के बहावलपुर मुख्यालय जैसे मजबूत ठिकानों पर हमले के लिए उपयुक्त हैं। इनका निचला उड़ान पथ रडार से बचाता है, जो रात के ऑपरेशनों के लिए आदर्श है।
- HAMMER सटीक बम: ये मॉड्यूलर किट्स सामान्य बमों को GPS/INS-निर्देशित हथियारों में बदल देते हैं। इन्हें LeT के मुरीदके शिविर जैसे लक्ष्यों पर तेज और सटीक हमलों के लिए इस्तेमाल किया गया। ये हर मौसम में काम करते हैं, जो कम दृश्यता में प्रभावी हैं।
- लॉइटेरिंग मुनिशन्स: ये “कामिकाज़े” ड्रोन वास्तविक समय में लक्ष्य की पुष्टि करते हैं और लक्ष्य क्षेत्र में मंडराकर हमला करते हैं। ऑपरेशन सिन्दूर में इनका उपयोग कम नुकसान के साथ गतिशील लक्ष्यीकरण के लिए हुआ।
बालाकोट में SPICE-2000 बमों का उपयोग हुआ, जो GPS/INS और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर से सटीकता प्रदान करते हैं। इन हथियारों ने रात में JeM शिविर के विशिष्ट भवनों पर हमला किया, जब दुश्मन की सतर्कता कम थी।
3. खुफिया, निगरानी और टोही (ISR)
रात के ऑपरेशनों के लिए मजबूत ISR जरूरी है। ऑपरेशन सिन्दूर में भारत ने उपग्रह चित्र, ड्रोन निगरानी, मानव खुफिया (HUMINT), और सिग्नल खुफिया (SIGINT) का उपयोग किया। मुजफ्फराबाद, कोटली, और बहावलपुर जैसे ठिकानों की लंबे समय तक निगरानी की गई, और ड्रोन ने हमले से पहले गतिविधियों की पुष्टि की। इस बहु-स्तरीय ISR ने अंधेरे में भी सटीक हमले सुनिश्चित किए। बालाकोट में RISAT-2 उपग्रह और Heron ड्रोन ने JeM शिविर को चिह्नित किया।
4. हवाई चेतावनी और नियंत्रण (AEW&C) सिस्टम
DRDO नेट्रा और IAF फाल्कन जैसे AEW&C सिस्टम ने ऑपरेशन सिन्दूर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ये सिस्टम वास्तविक समय में दुश्मन के विमानों, मिसाइलों या रडार की जानकारी देते हैं। रात में ये IAF जेट्स को सुरक्षित मार्गदर्शन देते हैं और पाकिस्तानी व旁边还提到,“辛杜尔行动”的象征性命名——与文化和情感共鸣相关联——可能会引起国内和国际看法的极化,正如对其性别象征主义的女权主义批评所指出的。
结论
辛杜尔行动、巴拉科特 和 乌里 中印度对夜间行动的偏好反映了一种战略考量,平衡了惊喜、安全和精确度。夜视系统、精确制导武器、ISR、AEW&C 和防空系统等先进技术使印度能够以最小的附带损害和最大的影响力执行复杂任务。辛杜尔行动 的规模和技术复杂性标志着向预防性、技术强大的打击的理论转变,表明印度果断对抗恐怖主义的决心。然而,夜间行动的升级风险和技术依赖性需要谨慎校准,以避免意外后果。随着印度完善其夜间作战能力,它继续在动荡的区域环境中维护其战略自主权。

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