ॐ विश्वरूपाय नमः
विश्वं व्याप्तं चराचरं नित्यं विभुं सर्वगतं सुखाय |
रूपं धृत्वा ततो जगदात्मने श्रीमन्नारायणाय नमः || 1 ||

भूतभव्यभवत्प्रभवः प्रभुः त्रिकालज्ञः सर्वगः सर्वेश्वरः |
श्रीवत्सवक्षाः श्रीमतां वरः श्रीवासुदेवाय नमः || 2 ||

अग्रजः शर्वः करणं करणं वेदवेद्यो यज्ञः पवित्रमाङ्गं |
वेदाङ्गवेदविदेव वयोग्यो वेदात्मनाय नमः || 3 ||

लोकाध्यक्षः सूक्ष्मरूपः सूक्ष्मत्वातीतः सर्वगोऽधिकोऽधिगः |
आदित्यः सविता सूर्यो ब्रह्मा ब्रह्मकृत् ब्रह्मणोऽधिपः || 4 ||

आत्मानात्मनं सच्चिदात्मनं नित्यं गतिं नेति सर्वात्मकम् |
चिदग्निकुण्डसम्भूताय सूक्ष्माय सत्याय नमः || 5 ||

धातुः प्राधान्यः कारणं कारणं प्रधानं प्रभुः पुरुषोत्तमः |
क्षेत्रज्ञो ज्ञानिनां प्राणः प्राणदः प्राणवत्तमः || 6 ||

प्रणवोमनोमनोऽमृतांशुः शाश्वतश्चराचरात्मकः परः |
सत्यसंकल्पः सत्यविक्रमो नैकरूपः शतानन्दकृत् || 7 ||

शरणं शरण्यं शरणागतिः पारायणं पावनं पापनाशनम् |
जगतां पतये जगन्निवासाय विष्णवे ते नमः || 8 ||

यदुश्रेष्ठाय यदुनाथाय यदुतामपतये नमः |
यदुकुलोद्वहाय यदुवीराय यदुशान्ताय नमः || 9 ||

कैकेयीगर्भसम्भूताय दशरथाय नमो नमः |
सीतार्पिताखिलचित्तवासाय श्रीरामाय ते नमः || 10 ||

विष्णवे ते नमः

श्रीवत्सगदाशार्ङ्गशङ्खचक्रे
कौस्तुभो नमोऽन्तर्हिताय देवाय |
नारायणाय जगदाय विष्णवे
तुष्टाय तत्त्वविदुत्तमाय च नमः || 11 ||

तपत्रयाय शङ्खाय सूर्यकोटिप्रकाशिने
तेजोराशय नित्याय सर्वलोकाय ते नमः |
महाप्रलयनायकाय कल्याणगुणशालिने
महापुरुषाय विष्णवे वराय दीप्ताय ते नमः || 12 ||

सुरलोकाय लोकाध्यक्षाय लोकनाथाय
कलाय सर्वकलानामधिपाय ते नमः |
जगज्जननाय जगन्नाथाय जगद्योनये
जगत्पित्रे जगद्धात्रे जगदाधाराय ते नमः || 13 ||

आदित्याय तपत्रयाय शङ्खाय सुधाकराय
शाश्वताय प्रकाशाय वराङ्गाय ते नमः |
अजाय नित्याय शुद्धाय बुद्धाय मुक्तये
पुण्याय ब्रह्मणे नित्याय पुरुषाय ते नमः || 14 ||

अमराय महात्मने कान्ताय देवयोनये
पापनाशाय पुण्याय परमाय ते नमः |
सर्वगताय सर्वदाय सर्वात्मने सतांपते
परायणाय परात्पराय ते नमः || 15 ||

अच्युताय नित्याय अनन्ताय श्रीमते नमो नमः |
पुरुषोत्तमाय अनादिनिधनाय प्रभाविणे
उत्तारणाय तारणाय दिव्याय ते नमः || 16 ||

क्षीराब्धिशयनाय दुर्विषयाय दुरासदाय
सर्वाय सुरसूदनाय विद्महे |
वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् || 17 ||

अनन्तायानन्ताय सुधायाय गुणाकराय
गुणातिताय गुणगणाय गुणेशये नमः |
नानावर्णाय नानारूपाय नानायोनये
नानाकर्मफलप्रदाय नानामित्राय ते नमः || 18 ||

आनन्दाय सर्वलोकाय अनन्दाय विनायकाय
सर्वेश्वराय सर्वात्मने जगदेकपित्रे नमः |
अजयाय नित्ययुक्ताय सत्याय परमात्मने
पुरुषाय पुराणाय आदिदेवाय ते नमः || 19 ||

नरसिंहाय परब्रह्मने हरिणाक्षाय नमो नमः |
सर्वेश्वराय सर्वलोकाय सर्वकारणाय
सर्वदेवाय नमो नमः || 20 ||


सर्वरूपाय सर्वयोगिने सर्वभावाय सर्वभूषणाय
सर्वशक्तिमते सर्वान्तरात्मने सर्वज्ञाय सर्वज्ञानगणाय
सर्वव्यापिने सर्वेश्वराय सर्वकारणाय सर्वभूताय
सर्वदेवाय सर्वदैत्यक्षयाय सर्वलोकाय नमो नमः || 21 ||

नरायणाय वासुदेवाय हरये अनन्ताय नमो नमः |
प्रपन्नाय परिपालयाय मां पाहि मुक्तये
नमोऽनन्ताय नमोऽनन्ताय नमोऽनन्ताय नमो नमः || 22 ||

श्रीवत्सवक्षस्थलायाय नमो नमः
पीताम्बराय गरुडाय नमो नमः |
अजाय देवकीनन्दनाय नमो नमः
यशोदानन्दनाय नमो नमः || 23 ||

ब्रह्मण्याय नमो नमः
ब्रह्मकृते ब्रह्मज्ञानाय नमो नमः |
ब्रह्माव्याय ब्रह्मशिल्पिने नमो नमः
ब्रह्मरूपाय ब्रह्मनिष्ठाय नमो नमः || 24 ||

परात्पराय नमो नमः
परमात्मने परमानन्दाय नमो नमः |
परब्रह्मणे पराय नमो नमः
पराक्रमाय पराय नमो नमः || 25 ||

विभावरय नमो नमः
शब्दातिगाय शब्दगतये नमो नमः |
योगिने योगविदां नेत्रे नमो नमः
योगेश्वराय योगभृते नमो नमः || 26 ||

कालकालाय नमो नमः
कालातीताय कालकालाय नमो नमः |
कालात्मने कालरूपाय नमो नमः
कालात्मकाय कालशक्तये नमो नमः || 27 ||

कालाय नमो नमः
कालकालय कालसत्तमाय नमो नमः |
कालकालीनगतये नमो नमः
कालरूपाय कालपुरुषाय नमो नमः || 28 ||

उत्तारणाय नमो नमः
उत्तारणगतये नमो नमः |
उत्तारणायोत्तमाय नमो नमः
उत्तारणप्रियाय नमो नमः || 29 ||

अनन्तरूपाय नमो नमः अनन्तशीलाय अनन्तगुणाय नमो नमः |

अनन्तदेवाय नमो नमः अनन्तरूपाय अनन्तनामाय नमो नमः ||

– Rajesh Kuttan

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प्रतिशोध की अग्नि में जन्मा यह काव्य, शक्ति नहीं—स्मृति की राजनीति रचता है। यह कथा है उस पराजित पुरुष की, जिसने युद्ध तलवार से नहीं, इतिहास की दिशा मोड़कर लड़ा। महाकाव्य पूछता है—यदि विजेता बदल जाए, तो धर्म का चेहरा कौन तय करेगा?.

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इतिहास केवल विजेताओं द्वारा लिखा गया दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि पराजितों की राख में दबी हुई एक दूसरी पुस्तक भी होती|

प्रतिशोध की अग्नि में जन्मा यह काव्य, शक्ति नहीं—स्मृति की राजनीति रचता है। यह कथा है उस पराजित पुरुष की, जिसने युद्ध तलवार से नहीं, इतिहास की दिशा मोड़कर लड़ा। महाकाव्य पूछता है—यदि विजेता बदल जाए, तो धर्म का चेहरा कौन तय करेगा?