शैलेन्द्रे शिखरे रम्ये, नीलकण्ठे त्रिनेत्रके।
नटराजे विभूषिते, नचति जगतां पते॥

धराधरेन्द्रनंदने, विशालाक्षे विनायक।
नटराजात्मजाय तुभ्यं, नमामि तं नटेश्वर॥

अनन्तकोटि-ब्रह्माण्डनायक, प्रलयान्तकृते रुद्र।
आदित्यान्तकृते देव, नमामि तं नटेश्वर॥

नाट्यशास्त्रप्रवर्तक, सुराणां प्रियदर्शन।
सर्वलोकैकनायक, नमामि तं नटेश्वर॥

मृगधराय त्रिपुरान्तकृते, दारुणाय शूलिने।
अशेषविश्वाय देव, नमामि तं नटेश्वर॥

वृषभध्वजाय वन्द्याय, शम्भोः प्रियाय च मूर्तये।
नटराजाय रुद्र, तुभ्यं, नमामि तं नटेश्वर॥

मौनीश्वराय भूतादिभिः सेव्यमानाय तेजसे।
कैलाससदृशाय देव, नमामि तं नटेश्वर॥

सर्वलोकेश्वराय तुभ्यं, नमो नमः सदाशिव।
नटराजाय रुद्र, तुभ्यं, प्रणमामि तं प्रभु॥

नवीनमेघनिभं चकोरबर्हिषं, सुरासुरैरपि वन्दितं त्रिनेत्रम्।
प्रभञ्जनभयं भवानिति ज्ञातं, नटेश्वरं त्वां नमतां भवानिदम्॥

कैलासशिखरे नटनं सरस्वत्या, वीणां व्याघ्रस्कन्धगणैर्विभूषितम्।
आत्मानमेव नटयन्तमनेकदा, प्रभूतमानन्दमयं त्रिनयनम्॥

त्वया यथा धृतराष्ट्रदत्तकोणाग्रे, सृष्टिर्नश्यति प्रलयेषु समये।
आदौ तदात्मनि विलीयते विश्वं, तदेव त्वदीयरसनाय महीयते॥

त्वन्मुखे सर्वमिदं प्रकृतिं पुरा, ब्रह्मादिकं च सुरगन्धर्वयक्षैः।
नट्याय यः प्रेष्यति योगिनामेको, व्योमेश तं त्वां नटनं प्रपद्ये॥

नचति लीलया तवात्मशक्तितः, प्रपञ्चपदातितमञ्जुलं प्रभुता।
आकाशकोटिप्रतिमं सुधीरपि, नत्वा तदीयं भवजलमन्वहे॥

नटेश त्वां योगिनः प्रपन्नपारयाः, संसारकूपाद्विमुक्तये सदा।
त्वन्नामसंकीर्तनमात्रेण चेदं, नश्येयं संसारदुःखं न जीवन्॥

नटेश त्वं त्रिपुरान्तकोणित्यमुम्, भक्त्या यथाऽहं जपतां भवानिदम्।
तथा समस्तं तव नामसंकीर्तनं, प्रभूतमद्भुतं तवोपकारिणम्॥

नतेश त्वं योगिनां परं सुखदं, नचति योगी तपसा न तीर्यम्।
त्वद्भक्तिरेका न सतां कुले जाता, त्वया हि योगी नचति तत्त्वतः॥

– Rajesh Kuttan

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प्रतिशोध की अग्नि में जन्मा यह काव्य, शक्ति नहीं—स्मृति की राजनीति रचता है। यह कथा है उस पराजित पुरुष की, जिसने युद्ध तलवार से नहीं, इतिहास की दिशा मोड़कर लड़ा। महाकाव्य पूछता है—यदि विजेता बदल जाए, तो धर्म का चेहरा कौन तय करेगा?.

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प्रतिशोध की अग्नि में जन्मा यह काव्य, शक्ति नहीं—स्मृति की राजनीति रचता है। यह कथा है उस पराजित पुरुष की, जिसने युद्ध तलवार से नहीं, इतिहास की दिशा मोड़कर लड़ा। महाकाव्य पूछता है—यदि विजेता बदल जाए, तो धर्म का चेहरा कौन तय करेगा?