एक बात कहु जो तुझ में है
सब जान गया जो तुझ में है
एक प्यास भरा है सागर तू
हर रंग घुला है अम्बर तू
तेरा लिखा हुआ गीत मैं
तू गा रहा मेरे जीत में
मेरे हौसलो की बारिशें
गुजरे है तेरे दर से सब
मेरे जुनु का रास्ता
रुक कर तुम्हें ही पूछते
तुझ में खिला है मेरा मन
तुझ में छुपा सारा उपवन
खुश्बू से भरा हैं तेरा रूह
फूलो में भरी तेरी खुशबू
तेरा छुआ हुआ स्पर्श मैं
तू महक रहा मेरे हर्ष में
मेरे धैर्य की अडिग पर्वते
थमे है तेरे पग में सब
मेरे नयन का वास्ता
झुक कर तुम्हे को पूजते
एक बात कहु जो तुझ में है
सब जान गया जो तुझ में है
एक प्यास भरा है सागर तू
हर रंग घुला है अम्बर तू
राजेश कुट्टन ‘मानव’

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