यादो को तेरे सजा कर रखा
यादो को तेरे छुपा कर रखा
तू न आये तो क्या
तू न आये तो क्या
तेरी बातो से खुद को
जगाये रखा
दिल को दीपक बना कर जलाये हुए है
तेरी रौशनी से नहाये हुए है
कितने परतों में तुमको छुपाये प्रिये
गीत अपने मिलन की सुनाये हुए है
अभी वक़्त से छूट कर गिर पड़े है
वो तारे सभी जगमाये हुए है।
थक गया हूं ख्यालो में तुमको चूरा के
आ भी जाओ के अब तो मुझे चुम लो।
यादो को तेरे सजा कर रखा
यादो को तेरे छुपा कर रखा
तू न आये तो क्या
तू न आये तो क्या
तेरी बातो से खुद को जगाये रखा
राजेश कुट्टन “मानव”
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