हम जिसके झूठ को आदिल कर गए
उसी पर मेरे यार ने मक्का बना दिया
एक कमरे के दीवार पर सारा जहां मेरा
उसी पर मेरे यार ने इस्तहार छपा दिया
मेरी जरूरतों से भी छोटा था मेरा बटुआ
उसी पर मेरे यार ने कब्ज़ा जमा लिया
दुनिया से तंग मैं, मेरे सिर्फ चंद लोग
उसे भी मेरे यार ने जहन्नुम बना दिया
राजेश कुट्टन ‘मानव’

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