अपनी चाहत किसी इंसान तक पहुंचने की कभी नहीं रखो | हमेशा कोशिश करो के जो भी मिले उस से स्नेह सम्मान के साथ मिले, वो हमे याद रहे न रहे पर सामने वाले पर प्रभाव छोड़ जाये | गांधीजी की वो लाइन के “जो सम्मान आप अपने लिए चाहते हो वो आप दूसरे को दो” चरित्रात करते रहे | किसी के साथ भी भेदभाव नहीं करो | ये सब वो है जो आप को नित करना है लेकिन यहां मेरे जीवन के अनुभव से कुछ साँझा कर रहा हु जो आप को हमेशा याद रखना है और सख्ती से पालन करना है :

१. आप के अपने ख़ुशी और सम्मान से बड़ा कुछ नहीं है, न माँ बाप, न भाई बहन, न ही बड़े सच्चे से लगने वाले वो दोस्त और न ही सबरे शाम आप पर मर मिटने वाली कसमे खाने वाली आपकी बीवी/गर्ल फ्रेंड /पति/बॉय फ्रेंड और न ही जिगर के टुकड़े से लगने वाले आप के बच्चे अगर आप माता या पिता है | आप के जीवन का केंद्र बिंदु जब तक आप खुद नहीं होंगे तब तक सभी मोह माया की दौड़ व्यर्थ है | ज़िन्दगी दुसरो के लिए खपाने के लिए नहीं है, ज़िदगी खुद को जानने और प्रकाशित करने के लिए होता है और सफर में आने वाले अगर इसमें रोड़ा बनते है तो उन्हें वक़्त रहते अलविदा कह देना चाहिए, ज़रा सी भी देरी आपको सफर में भटका सकती है |

२. आप का किया हुआ कोई भी कार्य व्यर्थ नहीं है, लिए हुए निर्णय पर खेद करना मूर्खता है | अपने अनुभवों को कुंठा की पोटली न बनाये बल्कि अलंकार बनाकर धारण करे |

३. अगर जीवन में निर्णय लेना हो और असमंजस में हो, तो कभी भी खुद को चोट पहुंचाने वाला निर्णय न करे | निर्णय लेने में वक़्त लगता है तो लगने दे, और इस बीच कुछ छूट जाता है तो जाने दे, मंथन में जहर और अमृत का पता चलता है |

४. दुसरो के शर्तो पर नौकरी तक ठीक है, उसके अलावा कुछ भी आप को कमज़ोर और नपुंसक बनता है |

५. जीवन को सही और गलत के पैमानों में कभी न तौलो | सही और गलत सिर्फ नजरिया है जो वक़्त के साथ अपना मुखौटा बदलता रहता है | अपना सच खुद ढूंढो और जीओ |

६. किसी भी रिश्ते, विचारधारा या भाव को कभी भी खुद से ज्यादा मोल मत दो | जीवन हर वक़्त नए सम्भावनो को जन्म देता रहता है, यहां कुछ भी स्थाइ नहीं है | थोड़ा इंतज़ार करो और सब बदलते देखो |

७. एक साधु ने अमरकंटक के जंगलो में मुझे बड़ा ज्ञान दिया था, “बेटा कभी मल मूत्र के पीछे मत जाना, जीवन उसमे नहीं है” | अच्छा भोजन हो या ख़ूबसूरत शरीर, सिर्फ भोग तक उचित है, इसका दिन रात विवेचना करते रहना मार्ग से दिग्भर्मित करता है |

आप कभी भी निराश हो, हारा महसूस कर रहे हो और कुछ रास्ता नहीं सुझ रहा हो, तो आप मुझ से बात कर सकते है | मैं जरूर आऊंगा आपकी मदद के लिए | आप मुझे लिख सकते है iamrajeshkuttan@gmail.com या व्हाट्सप्प मैसेज कर सकते है +971559856752 पर | याद रहे आप सा ख़ूबसूरत और जानदार कुछ इस जटिल संसार में है तो वो आप खुद है |

4 responses to “मेरे ७ जीवन सूत्र”

  1. जी शुक्रिया प्रिया

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  2. काव्य अथवा भाषा को शोभा बनाने वाले मनोरंजक ढंग को alankarकहते है।

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  3. Bahut hi prernadayak 👌

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया श्वेता

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प्रतिशोध की अग्नि में जन्मा यह काव्य, शक्ति नहीं—स्मृति की राजनीति रचता है। यह कथा है उस पराजित पुरुष की, जिसने युद्ध तलवार से नहीं, इतिहास की दिशा मोड़कर लड़ा। महाकाव्य पूछता है—यदि विजेता बदल जाए, तो धर्म का चेहरा कौन तय करेगा?.

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