मैंने कई बार कहा है के “अगले जन्म मुझे बिटिया ही कीजो”| ऐसा नहीं के मुझे नहीं मालूम के कितना मुश्किल है स्त्री होना, आप चाहे किसी भी देश की औरत हो, आपकी मुसीबतों में कोई कमी नहीं होगी| पर अब मुझे लगता है के मेरी बिटिया ये जोखिम ले सकती है तो मैं भी देखना चाहूंगा के कैसे दुनिया भर की औरतें संघर्ष कर रही है अपना अस्तित्व बचाने के लिए| अगर आपका जीवन सरल और सहूलियत से भरा है तो उन बाकि बची ८०% औरतों के लिए जरूर प्रार्थना करे, क्यों कि, १०० में से ८० महिलाये अपने साँस लेने की कीमत चुका रही है, जिल्लत से, अपने लहू से, गरीबी और भूख से| विषय की गंभीरता इन आकड़ों से भी देखा जा सकता है :

  •  ३५% महिलाये शारीरक और यौन उत्पीड़न का शिकार होती है गैर मर्दो से और ७०% महिलाएं अपने अंतरंग साथी का शिकार होती है
  • २०१७ में ८७,००० औरतें मारी गई अपने अंतरंग साथी और परिवार वालो के हाथो से, मतलब १३७ महिलाओ का कत्ल हर रोज़, यह दुनियाभर की आंकड़े है |
  • ५१% व्यस्क स्त्री मानव तस्करी का शिकार होती है, और अवस्य्क बच्चो को जोड़ जिया जाए तो आंकड़े ७१% तक हो जाती है  मतलब अगर कत्ल से बच गई तो तस्करी कर दिए जाओगे |
  • बाल विवाह का चलन काफी कम हुआ है मगर आज भी दुनिया भर में करीब ६० करोड़ लड़कियों का विवाह हर साल उनके व्यस्क होने से पहले ही कर दी जाती है |
  • करीब २० करोड़ लड़कियों का जनन विकृति (Genital Mutilation) का शिकार होती है|
  • अमूमन हर साल १.५ करोड़ बच्चियों का रेप होता है, इनमे से कईओ की उम्र साल भर का भी नहीं होता है |
  • १० में से ८ महिलाये साइबर उत्पीड़न का शिकार होती है | व्हाट्सप्प और फेसबुक जैसे सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट और मोबाइल एप्प में यौन रूप से स्पष्ट मेसेजस और तस्वीर भेज कर उत्पीड़ित करते है |
  • हर ५ में से ३ महिलाये अपने कार्यस्थल में शारीरिक एवं मानसिक उत्पीड़न का शिकार होती है | उनमे वो महिलाये भी शामिल है जो कामयाबी की बुलंदी में है|

उत्पीड़न की लिस्ट बड़ी लम्बी है और जीवन तकलीफ भी है, पर इसका मतलब यह नहीं के हर जगह अँधेरा है| महिलाओं ने एक लम्बी लड़ाई लड़ी है अपने हक़ और वज़ूद के लिए| अपने आसपास कामियाब और सशक्त महिलाओ को देखता हु तो बड़ा गर्व होता है | हम सब कि कामयाबी तब तक अधूरी है जब तक हर एक महिला सुरक्षित, सेहतमंद, शिक्षित और आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हो जाती| एक औरत से घर बनता है, घर से समाज, समाज से राज, राज़ से राष्ट्र और राष्ट्र से जग| इस जग का सृजन औरत से है तो उसका पालनहार भी औरत से ही है, इसलिय जब तक एक स्त्री का विकास नहीं होता, सब का कल्याण रुका है |

तू संभावना है नए विस्तार की,
तू चेतना है हर नए विचार की।
तू टूट न जाना किसी भी विकराल से
तू स्पंदन है इस जगत के विकास की|

मानव

 

 

 

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प्रतिशोध की अग्नि में जन्मा यह काव्य, शक्ति नहीं—स्मृति की राजनीति रचता है। यह कथा है उस पराजित पुरुष की, जिसने युद्ध तलवार से नहीं, इतिहास की दिशा मोड़कर लड़ा। महाकाव्य पूछता है—यदि विजेता बदल जाए, तो धर्म का चेहरा कौन तय करेगा?.

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प्रतिशोध की अग्नि में जन्मा यह काव्य, शक्ति नहीं—स्मृति की राजनीति रचता है। यह कथा है उस पराजित पुरुष की, जिसने युद्ध तलवार से नहीं, इतिहास की दिशा मोड़कर लड़ा। महाकाव्य पूछता है—यदि विजेता बदल जाए, तो धर्म का चेहरा कौन तय करेगा?