कई बार देखा , पर मन नहीं भरा है
तू अब भी मेरे लिए एक अफ़सरा है
वही रेशम अभी भी है बातो में
धरा पे पहली बूंदों सी महक सासो में
माना कोई भी नहीं हु मैं तेरा
तेरी अस्मा कही, कही जमी मेरा
इन्द्रधनुस के दो छोर से है हम
जो मुस्करानते रंगो से भरा है
तू अब भी मेरे लिए एक अफ़सरा है
कई बार देखा पर मन नहीं भरा है
मानव

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